पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप MCQ – Daily Study
पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप MCQ – Daily Study
पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
1. हवा के तेज वेग से बने रेतीले टीलों को क्या कहते हैं?
(A) भृगु (क्लिफ)
(B) गह्वर (सक)
(C) मरुटिेब्बा (ड्यून)
(D) हमादा
Answer: (C) मरुटिेब्बा (ड्यून)
Explanation: पवन द्वारा रेत एवं बालू के निक्षेप से निर्मित टीलों को मसुटिब्बा या बालुका स्तूप (Dunes) कहते हैं। इन स्तूपों का निर्माण मरुस्थलीय क्षेत्रों में शुष्क तथा अर्धशुष्क भागों के अतिरिक्त सागर तटीय भागों, झीलों के रेतीले तटों पर रेतीले प्रदेशों से होकर प्रवाहित होने वाली सरिताओं के बाढ़ के क्षेत्रों आदि में भी होता है। जहाँ कहीं भी शुष्क रेत सुलभ होती है तथा पवन इतनी शक्तिशाली होती है कि उनको निक्षेपित करके स्तूपों का निर्माण कर सके, वहाँ पर बालुका स्तुपों का निर्माण हो जाता है।
2. पथरीले रेगिस्तानों में एक दिशा में लगातार चलने वाली हवाएँ क्या बनाती हैं?
(A) चिमनी
(B) मशरूम चट्टान
(C) यारडंग
(D) करकरा
Answer: (C) यारडंग
Explanation: यारडंग (Yardang) का निर्माण निश्चित रूप से पवन की दिशा के समानान्तर रूप से पवन के अपघर्षण (Abrasion) कार्य द्वारा होता है। यारडंग की ऊॅचाई 20 फीट तक तथा चौडाई 30 से 120 फीट तक होती है।
3. निलंबी घाटी (Hanging Valley) निम्नलिखित में से किसकी क्रिया द्वारा बनती है?
(A) हिमनद
(B) नदी
(C) समुद्र
(D) पवन
Answer: (A) हिमनद
Explanation: जब हिमनद की मुख्य घाटी के तल से उसमें मिलने वाली सहायक घाटियों के तल अधिक ऊँचे होते हैं, तो सहायक घाटियाँ मख्य घाटी में लटकती हुई प्रतीत होती हैं। इसी कारण से उन्हें लटकती घाटियाँ या निलम्बित घाटियाँ या बहिर्लम्बी घाटियाँ कहते हैं।
4. हिमोढ़ (Moraine) कहाँ बनते हैं?
(A) नदियों के डेल्टा
(B) शुष्क क्षेत्र
(C) हिमानी क्षेत्र
(D) मानसून क्षेत्र
Answer: (C) हिमानी क्षेत्र
Explanation: हिमनद अपने साथ बारीक कणों वाले पदार्थ से लेकर बड़े-बड़े शिलाखण्डों का परिवहन करते हैं। हिमानियों द्वारा अपरदित व परिवहित पदाथों (हिमोढ़) का निक्षेपण प्रायः उन्हीं स्थानों पर होता है, जहाँ हिमानियोँ पिघलकर जल में परिवर्तित होती हैं।
5. छत्रक शैल (शिला) विशिष्ट प्रकार की भू-आकृतियाँ जो दिखाई देती हैं-
(A) नदी घाटियों में
(B) पर्वत शिखरों पर
(C) तटीय क्षेत्रों में।
(D) मरुस्थलों में
Answer: (D) मरुस्थलों में
Explanation: मरुस्थलीय भागों में यदि कठोर शैल के रूप में ऊपरी आवरण के नीचे कोमल शैल लम्बवत् रूप में मिलती हैं तो उस पर पवन के अपघर्षण के प्रभाव से विचित्र प्रकार की स्थलाकृतियों का निर्माण होता है, जिसे छत्रक शैल (Mushroom Rocks) के नाम से जाना जाता है।
6. निम्नालिखित में से कौन-सा एक भूमिगत जल-क्रिया का परिणाम नही हैं?
(A) स्टेलेक्टाइट
(B) स्टेलेग्माइट
(C) सिंकहोल
(D) फियोर्ड
Answer: (D) फियोर्ड
Explanation: स्टेलेक्टाइट, स्टेलेग्माइट तथा सिंकहोल भूमिगत जल के निक्षेपणात्मक कार्यों के परिणाम हैं, इन्हें कार्स्ट स्थलाकृतियाँ भी कहते हैं। जबकि दंतुरित तट (फियोर्ड) हिमानीकृत घाटी है। नार्वे का तट फियोर्ड तट का प्रमुख उदाहरण है।
7. मरुभूमि के विस्तार को रोकने के लिए, वृक्षारोपण पट्टियों अथवा खण्डों में, सबसे छोटे वृक्ष मरुस्थल की ओर तथा सबसे ऊँचे वृक्ष मरुस्थल के विपरीत दिशा में रोपित किये जाते हैं। इस रोपण का नाम क्या है?
(A) रक्षक-मेखलाएँ
(B) कृषि-वन
(C) वात-रोध
(D) सामाजिक-वन
Answer: (C) वात-रोध
Explanation: मरुस्थल में वात-रोध उस स्थिति को कहते हैं, जब मरुस्थल में अपरदन को रोकने के लिए वहाँ छोटे और बड़े पेड़ों का विस्तार किया जाता है। इसके अंतर्गत छोटे वृक्ष मरुस्थल की ओर तथा ऊॅँचे वृक्ष मरूस्थल के विपरीत दिशा में लगाये जाते हैं।
(A) भृगु (क्लिफ)
(B) गह्वर (सक)
(C) मरुटिेब्बा (ड्यून)
(D) हमादा
Answer: (C) मरुटिेब्बा (ड्यून)
Explanation: पवन द्वारा रेत एवं बालू के निक्षेप से निर्मित टीलों को मसुटिब्बा या बालुका स्तूप (Dunes) कहते हैं। इन स्तूपों का निर्माण मरुस्थलीय क्षेत्रों में शुष्क तथा अर्धशुष्क भागों के अतिरिक्त सागर तटीय भागों, झीलों के रेतीले तटों पर रेतीले प्रदेशों से होकर प्रवाहित होने वाली सरिताओं के बाढ़ के क्षेत्रों आदि में भी होता है। जहाँ कहीं भी शुष्क रेत सुलभ होती है तथा पवन इतनी शक्तिशाली होती है कि उनको निक्षेपित करके स्तूपों का निर्माण कर सके, वहाँ पर बालुका स्तुपों का निर्माण हो जाता है।
2. पथरीले रेगिस्तानों में एक दिशा में लगातार चलने वाली हवाएँ क्या बनाती हैं?
(A) चिमनी
(B) मशरूम चट्टान
(C) यारडंग
(D) करकरा
Answer: (C) यारडंग
Explanation: यारडंग (Yardang) का निर्माण निश्चित रूप से पवन की दिशा के समानान्तर रूप से पवन के अपघर्षण (Abrasion) कार्य द्वारा होता है। यारडंग की ऊॅचाई 20 फीट तक तथा चौडाई 30 से 120 फीट तक होती है।
3. निलंबी घाटी (Hanging Valley) निम्नलिखित में से किसकी क्रिया द्वारा बनती है?
(A) हिमनद
(B) नदी
(C) समुद्र
(D) पवन
Answer: (A) हिमनद
Explanation: जब हिमनद की मुख्य घाटी के तल से उसमें मिलने वाली सहायक घाटियों के तल अधिक ऊँचे होते हैं, तो सहायक घाटियाँ मख्य घाटी में लटकती हुई प्रतीत होती हैं। इसी कारण से उन्हें लटकती घाटियाँ या निलम्बित घाटियाँ या बहिर्लम्बी घाटियाँ कहते हैं।
4. हिमोढ़ (Moraine) कहाँ बनते हैं?
(A) नदियों के डेल्टा
(B) शुष्क क्षेत्र
(C) हिमानी क्षेत्र
(D) मानसून क्षेत्र
Answer: (C) हिमानी क्षेत्र
Explanation: हिमनद अपने साथ बारीक कणों वाले पदार्थ से लेकर बड़े-बड़े शिलाखण्डों का परिवहन करते हैं। हिमानियों द्वारा अपरदित व परिवहित पदाथों (हिमोढ़) का निक्षेपण प्रायः उन्हीं स्थानों पर होता है, जहाँ हिमानियोँ पिघलकर जल में परिवर्तित होती हैं।
5. छत्रक शैल (शिला) विशिष्ट प्रकार की भू-आकृतियाँ जो दिखाई देती हैं-
(A) नदी घाटियों में
(B) पर्वत शिखरों पर
(C) तटीय क्षेत्रों में।
(D) मरुस्थलों में
Answer: (D) मरुस्थलों में
Explanation: मरुस्थलीय भागों में यदि कठोर शैल के रूप में ऊपरी आवरण के नीचे कोमल शैल लम्बवत् रूप में मिलती हैं तो उस पर पवन के अपघर्षण के प्रभाव से विचित्र प्रकार की स्थलाकृतियों का निर्माण होता है, जिसे छत्रक शैल (Mushroom Rocks) के नाम से जाना जाता है।
6. निम्नालिखित में से कौन-सा एक भूमिगत जल-क्रिया का परिणाम नही हैं?
(A) स्टेलेक्टाइट
(B) स्टेलेग्माइट
(C) सिंकहोल
(D) फियोर्ड
Answer: (D) फियोर्ड
Explanation: स्टेलेक्टाइट, स्टेलेग्माइट तथा सिंकहोल भूमिगत जल के निक्षेपणात्मक कार्यों के परिणाम हैं, इन्हें कार्स्ट स्थलाकृतियाँ भी कहते हैं। जबकि दंतुरित तट (फियोर्ड) हिमानीकृत घाटी है। नार्वे का तट फियोर्ड तट का प्रमुख उदाहरण है।
7. मरुभूमि के विस्तार को रोकने के लिए, वृक्षारोपण पट्टियों अथवा खण्डों में, सबसे छोटे वृक्ष मरुस्थल की ओर तथा सबसे ऊँचे वृक्ष मरुस्थल के विपरीत दिशा में रोपित किये जाते हैं। इस रोपण का नाम क्या है?
(A) रक्षक-मेखलाएँ
(B) कृषि-वन
(C) वात-रोध
(D) सामाजिक-वन
Answer: (C) वात-रोध
Explanation: मरुस्थल में वात-रोध उस स्थिति को कहते हैं, जब मरुस्थल में अपरदन को रोकने के लिए वहाँ छोटे और बड़े पेड़ों का विस्तार किया जाता है। इसके अंतर्गत छोटे वृक्ष मरुस्थल की ओर तथा ऊॅँचे वृक्ष मरूस्थल के विपरीत दिशा में लगाये जाते हैं।
