| पादप आकारिकी GK Questions पादपों की आकारिकी से संबंधित प्रश्न उत्तर | पादप आकारिकी GK Questions.

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पादपों की आकारिकी से संबंधित प्रश्न उत्तर

1. पादप के कायिक अंगों में शामिल नहीं है
(A) जड़
(B) तना
(C) बीज
(D) पत्तियाँ

उत्तर (C) – पादप के अंगों को मुख्यतः – दो वर्गो में विभाजित किया जाता है- (i) कायिक अंग (Vegetative Organs) इसके अंतर्गत जड़, तना पत्तियाँ शामिल की जाती है। (ii) प्रजनन अंग (Reproductive Organs) इसके अन्तर्गत बीज, फल तथा पुष्प शामिल किए जाते हैं।




2. ऐसे पौधे जिनके बीज के चारों और आवरण नहीं पाया जाता है कहलाते है ?
(A) आवृतबीजी
(B) अनावृतबीजी
(C) जलोद्भिद
(D) अधिपादप

उत्तर (B) – जिन पौधों के बीज के चारों और आवरण नहीं पाया जाता है है ये अनावृतबीजी (Gymnosperm) कहलाते हैं। इन पर पुष्प नहीं आते हैं। इनके जननांग प्राय एक लिंगी होते हैं और इनका परागण (Pollination) वायु द्वारा होता है। चीड़ (Pine) देवदार (Cedar). फर (Fir) स्प्रूस (Spruce) आदि अनावृतबीजी पादपों के प्रमुख उदाहरण है।




3. आवृतबीजी पादपों के विषय में असत्य कथन है-
(A) इनमें पुष्प पाए जाते हैं।
(B) इनके बीज फलों के भीतर बंद होते हैं।
(C) इनको एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री नामक दो वर्गों में बाँटा गया है।
(D) इनका संवहन तंत्र अल्पविकसित होता है।

उत्तर (D) – आवृतबीजी पादपों (Angiosperms) में बीज फलों के भीतर विकसित होते हैं। इन पादपों पर पुष्प आते है इसलिए इन सपुष्पीय पादप भी कहते हैं। इनके बीजों में एक अथवा दो बीजपत्र (Cotyledon) पाए जाते हैं। इसी आधार पर इन्हें एकबीजपत्री (Monocot) तथा द्विबीजपत्री (Dicot) नामक दो वर्गों में विभाजित किया गया है। आवृतबीजी पादपों पूर्ण विकसित संवहन तंत्र जो जाइलम एवं एलोएम पाया जाता है। आवृतबीजी पादप मनुष्य के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं जिनसे अनाज फल सब्जी लकड़ी आदि प्राप्त किये जाते हैं।




4. पादप जड़ों के सम्बंध में असत्य कथन है-
(A) जड़े सामान्यत: मूलांकुर (Radicle) से विकसित होती हैं।
(B) ये प्रकाश स्रोत की दिशा में विकसित होती हैं।
(C) जड़ों का अंतिम सिरा मूल गोप (Root Cap) के द्वारा सुरक्षित रहता है।
(D) एक बीजपत्री एवं द्विबीजपत्री पादपों की जड़े भिन्न-भिन्न होती हैं।

उत्तर (B) – पौधे का वह भाग जो बीजों के अंकुरण के समय मूलाकर से विकसित होता है जड़ (Root) कहलाता है। जड़े प्रकाश के विपरीत तथा गुरुत्वाकर्षण की ओर वृद्धि करती हैं। इनका अंतिम सिरा मूल गोप (Root Cap) के द्वारा सुरक्षित रहता है। एकबीजपत्री में अपस्थानिक जड़े (Adventitious Roots) तथा द्विबीजपत्री पादपों में मूसला जड़े (Top Roots) पायी जाती हैं।




5. ऐसी जड़े जो मूलांकुर (Radicle) के अतिरिक्त किसी अन्य भाग से विकसित होती हैं, कहलाती हैं-
(A) मूसला जड़े
(B) अपस्थानिक जड़े
(C) प्राथमिक जड़े
(D) द्वितीयक जड़े

उत्तर (B) – बीज के मूलांकर के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य भाग से विकसित होने वाली जड़े अपस्थानिक जड़े (Adventitious Roots) कहलाती हैं। इन्हें रेशेदार जड़े (Fibrous Roots) भी कहा जाता है। अपस्थानिक जड़ पौधे को यांत्रिक सहारा देने भोजन संग्रहण करने तथा अन्य जैविक क्रियाओं के लिए अनेक प्रकार से रूपांतरित हो जाती है।



6. निम्नलिखित में से किसे रेशेदार जड़ तंत्र कहा जाता है?
(A) अपस्थानिक जड़ तंत्र
(B) मूसला जड़ तंत्र
(C) तर्कु रूप जड़ तंत्र
(D) कुम्भी रूप जड़ तंत्र

उत्तर (A) – अपस्थानिक जड़ तंत्र ( Adventitious Roots System) को ही रेशेदार जड़ तंत्र (Fibrous Roots System) कहा जाता है जो एकबीजपत्री पादपों तथा फर्न में पाया जाता है। इस जड़ तंत्र में सामान्यत तने से ही शाखित जड़े (Branching) विकसित होती है। ये जड़े भूमि की सतह के समीप ही वृद्धि करती है। घास तथा नारियल के पौधों में रेशेदार जड़ तंत्र पाया जाता है!




7. सूची-1 को सूची-2 से सुमेलित करके सही कूट का चुनाव कीजिए।
सूची – 1                 सूची – 2
(A) पत्तागोभी         1. फल
(B) आलू                2. तना
(C) गाजर               3. पती
(D) शिमला मिर्च     4. जद


कूट
      (A) (B) (C) (D)
(A) 3      2    4    1
(B) 2      3     4    1
(C) 2      3     1    4
(D) 4      2     3     1

उत्तर (A) – विभिन्न पादपों के खाने वाले भाग निम्नवत हैं फल : शिमला, मिर्च, टमाटर फूल : फूलगंभी, ब्रोकली पत्तिया : पत्तागोभी, पालक तना : आलू, गन्ना बीज : मक्का, मटर, गेहूँ, चावल जड़ : गाजर, मूली




8. मूसला जड़ों के विषय में असत्य कथन की पहचान कीजिए।
(A) ये जड़े बीज के मूलांकुर से विकसित होती हैं।
(B) ये जड़े प्रायः द्विबीजपत्री पादपों में पायी जाती हैं।
(C) गाजर चुकंदर मूसला जड़ों के परिवर्तित रूप हैं।
(D) मूसला जड़े कन्दिल जड़े स्तम्भ मूल अपस्तम्भ मूल के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं।

उत्तर (D) – मूसला जड़े मूलांकुर से विकसित होती है जो प्रायः द्विबीजपत्री पादपों में पायी जाती हैं। गाजर चुकन्दर मूली मूंगफली आदि मूसला हो के उदाहरण है। मूसला जड़े तर्कुरूप (Fusiform ) कुम्भी रूप (Napiform) शंकुरुप (Conical) पिंडक जड़ों (Tuberculate Roots) तथा श्वसन मूल के रूप में रूपांतरित हो अपस्थानिक जड़ों के रूपांतरण है। जाती है जबकि कन्दिल जड़े स्तम्भमूल अपस्तम्भ मूल आदि अपस्थानिक जड़ों के रूपांतरण हैं।




9. निम्नलिखित में से किस पादप एवं उसके जड़ रूप का सही सुमेल नहीं है-
(A) डहेलिया पुलकित जड़े (Fasciculated Roots)
(B) बरगद, रबड़ स्तम्भ मूल (Prop Roots)
(C) मक्का, गन्ना अपस्तम्भ मूल (Stilt Roots)
(D) आम-अदरक कन्दिल जड़े (Tuberous Roots)

उत्तर (D) – आम-अदरक (Mango-Ginger) तथा हल्दी (Turmeric) ग्रन्थिल जड़ों (Nodulose Roots) का उदाहरण हैं। ये अपस्थानिक जड़ों के रूपांतरित स्वरूप हैं जिनमें जड़े फूलकर मांसल हो जाती है।




10. विश्व का सबसे छोटा तथा सबसे बड़ा पुष्प क्रमश कौन है ?
(A) रैफलेसिया एवं कमल
(B) वुल्फिया एवं रैफलेसिया
(C) लिली एवं फूलगोभी
(D) लैवेन्डर एवं ग्लेडिओलस

उत्तर (B) – विश्व का सबसे छोटा पुष्प वुल्फिया (Wolffia) है जिसे वाटरमील (Watermeal) अथवा डकवीड (Duckweed) भी कहा जाता है। यह एक जलीय पौधा (Aquatic Plant) है जो जल पर तैरता रहता है। रैफलेसिया अर्नाल्डी (Rafflesia Arnoldii) विश्व का सबसे बड़ा पुष्प है जिसका भार लगभग 10 किग्रा तथा व्यास लगभग 100 सेमी. होता है। इस पुष्प से सड़े हुए मांस जैसी दुर्गंध आती है।



11. पादपों के तनों से सम्बंधित सत्य कथन की पहचान कीजिए।
(A) तनों का विकास प्रांकुर (Plumule) से होता है।
(B) ये सामान्यतः प्रकाश की ओर तथा भूमि की विपरीत दिशा में विकास करते हैं।
(C) तनों पर पर्व (Nodes) तथा पर्वसंधियाँ (Internodes) पायी जाती हैं।
(D) उपर्युक्त सभी।

उत्तर (D) – तना (Stem) पौधे का वह भाग है जो बीज के प्रांकुर (Plumule) से विकसित होता है। यह पादपों की सहारा एवं दृढ़ता प्रदान करता है। तने का विकास सामान्यतः भूमि के विपरीत तथा प्रकाश की और होता है। इस पर पर्व पर्वसन्धियाँ वर्द्धी कलिकाएँ (Vegetative Buds) तथा पुष्प कलिकाएँ पाई जाती है। तनों को मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया है भूमिगत तने (Underground Stems) अर्द्ध-वायवीय तने (Sub-aerial Stems) तथा वायवीय तने।




12. भूमिगत तने का रूपान्तरण नहीं है-
(A) प्रकन्द
(B) स्तम्भ कन्द
(C) शल्क कन्द
(D) स्तम्भ प्रतान

उत्तर (D) – पौधों के तने का वह भाग जो बीज के भूमि के अन्दर पाया जाता है, भूमिगत तना (Underground Stem) कहलाता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भोजन संग्रहण के कारण ये तने मोटे एवं मांसल हो जाते हैं। भूमिगत तनों के रूपांतरित प्रकार एवं उनसे सम्बंधित पादप निम्नवत् है (i) प्रकन्द (Rhizome) : हल्दी, अदरक, केला, फर्न। (ii) स्तम्भ कंद (Stem Tuber) : आलू डहेलिया (iii) शल्ककंद (Bulb) : प्याज लहसुना (iv) घनकन्द (Corm) : जिमीकन्द केसर का पौधा




13. निम्नलिखित में से पत्तियों का रूपांतरित स्वरूप नहीं है।
(A) पर्ण कटक (Leaf Spine)
(B) पर्ण प्रतान (Leaf Tendril)
(C) घटपर्णी (Pitcher)
(D) पत्र प्रकलिका (Boulder)

उत्तर (D) – पत्तियाँ सामान्यतः हरी चपटी तथा पतली रचना वाले पादप अंग है जो प्रकाश संश्लेषण करके पौधों के लिए भोजन का निर्माण करती हैं। कुछ विशिष्ट कार्यों के सम्पादन के लिए पत्तियों का निम्नलिखित रूपों में रूपांतरण (Modification) हो जाता है जैसे पर्ण कंटक, पर्ण प्रतान, पर्णाभवृन्त हुक, शल्क, घटपर्णी, ब्लैडरवर्ट, चूषक, कंटक, पुष्पीयन अंग आदि। पत्तियाँ सामान्यतः हरी चपटी तथा पतली रचना वाले पादप अंग है जो प्रकाश संश्लेषण करके पौधों के लिए भोजन का निर्माण करती हैं। कुछ विशिष्ट कार्यों के सम्पादन के लिए पत्तियों का निम्नलिखित रूपों में रूपांतरण (Modification) हो जाता है जैसे पर्ण कंटक, पर्ण प्रतान, पर्णाभवृन्त हुक, शल्क, घटपर्णी, ब्लैडरवर्ट, चूषक, कंटक, पुष्पीयन अंग आदि।




14. विश्व का सर्वाधिक ऊँचा पौधा कौन है?
(A) यूकेलिप्टस
(B) पिथिरोकास
(C) पोलीऐल्थिया
(D) टेक्टोना

उत्तर (A) – यूकेलिप्टस पुष्पीय वृक्षों में सर्वाधिक ऊँचा वृक्ष होता है। यह अत्यधिक मात्रा में जल का अवशोषण करता है जिससे उस स्थान पर जल की कमी हो जाती है और भूमि बंजर होने लगती है। विश्व का सबसे ऊँचा वृक्ष सिकोया है।




15. अदरक एक तना है जड़ नहीं क्योंकि-
(A) यह भोज्य पदार्थ संग्रहित करता है।
(B) यह क्षैतिज रूप से भूमि में विकसित होता है।
(C) यह पर्व और पर्व संधियों युक्त होता है।
(D) यह क्लोरोफिल विहोन होता है।

उत्तर (C) – अदरक (Ginger) एक जड़ विहीन पौधा है। इसकी संरचना में पर्व (Node) तथा पर्व संधियों (Internodes) पायी जाती है जो कि तने की प्रमुख विशेषता है। अदरक एवं हल्दी तने का एक रूपांतरित रूप है जिसे प्रकंद (Rhizome) कहा जाता है।



16. वह शुष्क पुष्पकली जिसका प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है-
(A) इलायची (Cardamom)
(B) केसर (Saffron)
(C) दालचीनी (Cinnamon)
(D) लौंग (Clove)

उत्तर (D) – लौंग एक सुगंधित पुष्पकली (Aromatic Flower Bud) है जिसका प्रयोग मसाल के रूप में किया जाता है यह एक सदाबहार पौधा है जिसकी उत्पत्ति मूलतः इण्डोनेशिया में हुई थी। भारत बांग्लादेश पाकिस्तान श्रीलंका इण्डोनेशिया आदि देशों में इसका व्यापारिक उत्पादन किया जाता है।




17. घटपर्णी के निम्नलिखित भागों में से कौन सा एक घट में रूपांतरित होता है?
(A) तना (Stem)
(B) पत्ता (Leaf)
(C) पर्णवृंत (Petiole)
(D) अनुपर्ण (Stipule)

उत्तर (B) – घटपर्णी (Pitcher Plant) अथवा निपेन्थीज (Nepenthes) एक कीटभक्षी पादप हैं जिनके पत्ते (Leaves) अथवा पर्णफलक (Laminate) घट (Pitcher or Pitfall Trap) में रूपांतरित हो जाते हैं। इस घट के ऊपर ढक्कन के समान एक संरचना होती है और घट में उपस्थित पाचक एन्जाइम शिकार कीट को पचाकर पादप को पोषण मुख्यत: प्रोटीन प्रदान करते हैं। भारत के मेघालय राज्य में निपेंथीज खासियाना नामक एक दुर्लभ प्रजाति का घटपर्णी पौधा पाया जाता है।




18. निम्नलिखित में से कौन पुष्प का एक भाग नहीं है?
(A) दलपुंज (Corolla)
(B) पुमांग (Androecium)
(C) पर्णवृत
(D) जायांग

उत्तर (C) – पुष्पीय पौधों (Angiosperms) में पुष्प एक प्रजनन अंग है जो प्रायः तने या शाखाओं के शीर्ष अथवा पत्तियों के अक्ष (Axil) पर विकसित होता है तथा फल एवं बीज उत्पन्न करता है। पुष्प के प्रमुख भाग निम्नवत है बाह्य दलपुंज (Calyx) दलपुंज (Corolla) पुमांग (Androecium) तथा जायांग (Gynoecium) पर्णवृंत (Petiole) पत्ती एवं तने को जोड़ने वाली संरचना है जो पत्ती की प्रकाश में उठाए रखता है।




19. पारिस्थितिकीय वर्गीकरण के अन्तर्गत पापों का एक वर्ग नहीं है
(A) मरुद्भिद्
(B) लवणोद्भिद्
(C) जलोद्भिद्
(D) अधिपादप

उत्तर (D) – पारिस्थतिकीय वर्गीकरण के अनुसार पादपों को 4 प्रमुख वर्गो में विभाजित किया जाता है (i) जलोद्भिद् (Hydrophytes) : जलीय पादप इनमें द्वितीयक वृद्धि नहीं होती है। (ii) मरुद्भिद् (Xerophytes) : शुष्क एवं मरुस्थलीय स्थानों पर उगते हैं। (iii) मध्योद्भिद् (Mesophytes) सामान्य जलवायु में उगते है। (iv) लवणोद्भिद् (Halophytes) लवणीय मृदा एवं जल में उगत है जैसे मैंग्रोव वन।




20. नर पुष्प तथा मादा पुष्प दोनों को जन्म देने वाला पादप क्या कहलाता है?
(A) उभयलिंगी
(B) द्विबीजपत्री
(C) स्वपरागित
(D) उभयलिंगाश्रयी

उत्तर (D) – ऐसे पादप जिनमें नर पुष्प अर्थात् पुंकेसर युक्त पुष्प (Staminate) तथा मादा पुष्प अर्थात स्त्रीकेसर वाले पुष्प (Pistillate) दोनों एक साथ पाये जाते हैं उन्हें उभयलिंगाश्रयी पादप (Monoecious) कहा जाता है। उदाहरण आम मक्का अंगूर आदि)




21. ऐसे पादप जिनमें पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर दोनों एक ही पुष्प में पाए जाते हैं, वे क्या कहलाते है?
(A) उभयलिंगी
(B) एकबीजपत्री
(C) एकलिंगी
(D) एकलिंगा पी

उत्तर (A) – ऐसे पादप जिनमें एक ही पुष्प में पुंकेसर (Stamens) तथा स्त्रीकेसर (Pistils) दोनों उपस्थित होते हैं उभयलिंगी पादप (Hermaphrodite) कहलाते हैं। अधिकांश फसले जैसे- गेहूँ, दलहन तिलहन, धान आदि उभयलिंगी होती हैं।




22. निर्माण के आधार पर फलों को किन दो वर्गों में विभाजित किया जाता है?
(A) मीठे एवं खट्टे फल
(B) सरस एवं शुष्क फल
(C) सत्य एवं असत्य फल
(D) फल एवं मेवे

उत्तर (C) – फलों की निर्माण प्रक्रिया के आधार पर उन्हें दो वर्गों में विभाजित किया गया है सत्य फल (True Fruit) तथ असत्य फल (False Fruit)। जिन फलों का निर्माण पुष्प के अण्डाशय (Ovary) से होता है वे सत्य फल कहलाते है जैसे-आम, नीबू, नारियल आदि। इसके विपरीत जिन फलों का निर्माण पुष्प के अन्य अंगों जैसे-पुष्पासन (Thalamus), बाह्यदल पुंज (Calyx), दलपुंज (Corolla) आदि के द्वारा होता है वे असत्य फल (False Fruit) अथवा कूट फल कहलाते है, जैसे-सेब, अंजीर, शहतूत आदि।




23. सरल फल का उदाहरण है-
(A) आम, नींबू
(B) शहतूत, कटहल
(C) शरीफा, स्ट्राबेरी
(D) अंजीर, रसभरी

उत्तर (A) – फलों को मुख्यतः तीन वगों में विभाजित किया जाता है (i) सरल फल (Simple Fruit) – जब पुष्प के अण्डाशय से केवल एक ही फल का निर्माण होता है जैसे- आम, नीबू, सेब, सरसा आदि (ii) पुंज फल (Aggregate Fruit) – जब फलों का विकास एक पुष्प के अनेक विलगित स्त्रीकेसरों (Multiple Separate Pistols) से होता है। जैसे- शरीफा, रसभरी, कमल, स्ट्रॉबेरी आदि। (iii) समग्र फल (Composite Fruit) – ये असत्य फल होते हैं। इनका निर्माण सम्पूर्ण पुष्प क्रम (Inflorescence) के द्वारा होता है। जैसे- शहतूत, अनन्नास, अंजीर आदि।




24. वृक्ष की आयु का निर्धारण कैसे किया जाता है?
(A) इस भार के द्वारा
(B) इसकी ऊँचाई के द्वारा
(C) वार्षिक वलयों की संख्या के आधार पर
(D) जहाँ की लम्बाई के द्वारा

उत्तर (C) – वृक्षों के तने एवं शाखाओं की लम्बाई में पूर्ण वृद्धि के प्राथमिक वृद्धि (प्राथमिक वृद्धि) के बाद, वृक्ष की छाल एवं लकड़ी के मध्य स्थित कैम्बियम (Cambium) नामक पतली परत सक्रिय हो जाती है जो वृक्ष की मोटाई में वृद्धि करती है। यह वृक्ष की द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) कहलाती है। वृक्ष की द्वितीयक वृद्धि के कारण प्रतिवर्ष वृक्ष की लकड़ी में एक नई परत जुड़ जाती है जो | पुरानी परत से भिन्न दिखाई देती है। इन्हीं परतों को वार्षिक वलय (Annual Rings) कहा जाता है। इनकी गिनती से वृक्षों की आयु का निर्धारण किया जा सकता है।




25. पौधों में पाये जाने वाले हार्मोन्स के विषय में असत्य कथन है-
(A) पादप हार्मोन्स पौधों की वृद्धि को नियन्त्रित करते हैं।
(B) पादप हार्मोन्स के पाँच वर्ग हैं।
(C) ऑक्सिन हार्मोन बीज रहित फलों का उत्पादन करने में सहायक है।
(D) इंसुलिन पादपों में वृद्धिकारक हार्मोन है।

उत्तर (D) – पादप हार्मोन्स कार्बनिक पदार्थ हैं, जो पौधों में वृद्धि प्रजनन व उपापचय क्रियाओं को नियमित करते हैं। पादप हार्मोन्स के 5 प्रमुख वर्ग है- (1) ऑक्सिन, (2) एथिलीन (3) साइटोकाइनिन 4. एबिसिक अम्ल जिबरेलिन। ऑक्सिन नामक हार्मोन के प्रयोग से टमाटर नींबू, सन्तरा, केला आदि के बीज रहित फलों का उत्पादन करने में किया जा सकता है। इंसुलिन एक जन्तु हार्मोन है, जिसको कमी से मनुष्यों में मधुमेह (Diabetes) नामक रोग हो जाता है।




26. बायो-डीजल बनाने में किस वनस्पति का प्रयोग किया जाता है?
(A) गन्ना
(B) सफेद मूली
(C) सनई
(D) रतनजोत

उत्तर (D) – बायो-डीजल (Bio-Diesel) बनाने के लिए जैट्रोफा या रतनजोत (Jatropha Curcas) नामक पौधे का प्रयोग किया जाता है। यह एक आवृतबीजी पादप (Angiospermic Plants) है. जिसके बीज से बायो डीजल प्राप्त किया जाता है। इस बायो-डीजल का उपयोग डीजल के परम्परागत विकल्प के रूप में किया जाता है।

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