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तरंग से संबंधित प्रश्न उत्तर | Wave Related Questions In Hindi | तरंग से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्न
1. धवनि का तारत्व (Pritch) किस पर निर्भर है?
(A) आवृत्ति
(B) तीव्रता
(C) वेग
(D) आयाम
उत्तर (A)
ध्वनि का वह लक्षण ज़िसके कारण हम ध्वनि को मोटी या पतली कहते हैं तारत्व कहलाता है। ध्वनि का तारित्व उसकी आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है। अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व (Pitch) अधिक होता है और वह ध्वनि पतली होती है, जबकि कम आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व कम होता है और वह ध्वनि मोटी होती है। पुरुषों की ध्वनि का तारत्व स्त्रियों की ध्वनि की अपेक्षा कम होता है।
2. निम्नलिखित में से किसका ध्वनि के वेग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ?
(A) दाब
(B) तापमान
(C) आर्द्रता
(D) घनत्व
उत्तर (A)
ध्वनि तरंगें यांत्रिक एवं अनुदैध्य तंरंगें होती हैं जो ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं। माध्यम का ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ जाता है परंतु दाब परिवर्तन का ध्वनि के वंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. तंतु वाले प्रकाश बल्ब में प्रयोग की गई अधिकांश विद्युत किस रूप में परिवर्तित होती है?
(A) दृश्य प्रकाश के रूप में
(B) अवरक्त किरणों के रूप में ।
(C) पराबैंगनी किरणों के रूप में
(D) प्रतिदीप्ति प्रकाश के रूप में
उत्तर (A)
तंतु प्रकार के प्रकाश बल्व में प्रयोग की गई अधिकांश विद्युत शक्ति दृश्य प्रकाश (Visible Light) के रूप में प्रकट होती है। तंतु वाले प्रकाश बल्व में उच्च प्रतिरोधकता (High Resistance) वाली धातुओं का तंतु (Filament) प्रयोग किया जाता है। जो विद्युत धारा के प्रवाह से अत्यधिक गर्म होकर चमकने लगता है। यह प्रभाव उद्दीप्ति (Incandescence) कहलाता है। इस प्रकार यह विद्युत ऊरजा को दृश्य प्रकाश (Visible Light) एवं ऊष्मा (Heat) में परिवर्तित कर देता है।
4. धवनि प्रदूषण (स्तर) की इकाई व्या है ?
(A) डेसिबल
(B) डाब्सन
(C) पी.पी.एम.
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर (A)
ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल (Decibel-dB) में मापते हैं। डेसिबल स्तर जितना अधिक होगा, ध्वनि की तीव्रता भी उतनी अधिक होगी।
5. अधिकेंद्र ( एपिसेंटर ) का संबंध किससे है?
(A) भूकंपों से
(B) ज्वालामुखियों से
(C) चक्रवातों से
(D) भुस्खलनों से
उत्तर (A)
पृथ्वी के भीतर स्थित वह बिन्दु जहाँ से भूकम्प उत्पन होता है, उसे भूकम्प मूल (Focus) अथवा हाइपोसेन्टर (Hypocenter) कहते हैं। भूकम्य मूल के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित वह बिन्द, जहाँ भूकम्पीय तरंगों (Seismic Waves) का अनुभव सबसे पहले होता है, अधिकेन्द्र (Epicenter) कहलाता है।
6. धवनि ऊजों को विद्युत ऊरजां में परिवर्तित किया जाता है।
(A) माइक्रोफोन द्वारा
(B) लाउडस्पीकर द्वारा
(C) सौर सेल द्वारा
(D) ग्रामोफोन द्वारा
उत्तर (A)
माइक्रोफोन एक प्रकार का ट्रासड्यूसर यत्र (ऊर्जा को एक रूप से दुसरे रूप में परिवर्तिंत करने वाला) है, जो ध्वनि ऊर्जा (Acoustic Energy) को विद्युत ऊजां (Electrical Energy) में परिवर्तित करता है। माइक्रोफोन में एक डायाफ़राम(Diaphragrmm) लगा होता है, जो ध्वनि तरंगों (Sound Waves) के आधात से कम्पन (Vibrate) करने लगता है। इसके कम्पन के कारण माइक्रोफोन के अन्य अवयव भी कम्पन करने लगते हैं। ये कंपन (Vibrations) एक विद्युत धारा में परिवर्तित होकर ऑडियो सिग्नल बन जाते हैं जो दूसरे सिरे पर जुड़े हुए लाउड स्पीकर के द्वारा पुन: ध्वनि ऊर्जा में बदल दिए जाते हैं।
7. एक्स-रे की खोज किसने की थी?
(A) बेकुरल
(B) रोएंटजन
(C) मैरी क्यूरी
(D) वान लू
उत्तर (B)
एक्स-किरणें (X-Rays) विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम (Electromagnetic Spectrum) का भाग हैं। इनकी खोज जर्मन प्रोफेसर विल्हेम कोनरेड रोएंटजन ने 1895 ई. में की थी। इसीलिए एक्स- किरणों को रोएंटजन विकिरण भी कहा जाता है। अधिकांश एक्स किरणों की तरंग दैध्र्य (Wave length) 0.01-10 नैनोमीटर के बीच होती है।
8. खतरे के सिग्नल लाल रंग के होते हैं, जबकि आँखे पीले रंग के प्रति अधिक संवेदन्शील होती हैं, क्योंकि-
(A) पीले की अपेक्षा लाल प्रकाश में अवशोषण कम होता है।
(B) लाल की अपेक्षा पीले प्रकाश में प्रकीर्णन कम होता है।
(C) लाल प्रकाश का तंरंगदैध्य पीले प्रकाश से अधिक होता है
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर (C)
दृश्य प्रकाश वर्णक्रम (Visible Light Spectrurm) में बैंगनी रंग (Violet) की तरंगदेध्य सबसे कम तथा लाल रंग (Red) की तरंगदैध्ध्य सबसे अधिक होती है। इसीलिए, लाल रंग का प्रकीर्णन (Scattering) सबसे कम होता है और यह अन्य रंगों की तुलना में सर्वाधिक दूरी तक दिखायी देता है। इसी कारण लाल रंग का प्रयोग खतरे के संकेत के रूप में किया जाता है।
9. बोलोमीटर का प्रयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?
(A) आवृत्ति
(B) विद्युत चुम्बकीय विकिरण
(C) वेग
(D) तरंग दैध्ध्य
उत्तर (B)
बोलोमीटर (Bolormeter) एक अति संवेदनशील (Highly Sensitive) यंत्र है, जिसका प्रयोग ऊष्मा अथवा विद्युत चुम्बकीय विकिरण मापने के लिए किया जाता है। इस यंत्र में धातू की पतली अवशोषक पट्टी (Absorptive Metal Strip) लगी होती है जो एक तापीय स्रोत (Thermal source) से जुड़ी होती है। जब यह पद्टी तापीय विकिरण को सम्पर्क में आती है तो विकिरण को अवशोषित करने के कारण इसका ताप बढ़ जाता है। तापमान में हुआ यह परिवर्तन प्रतिरोधी थर्मामीटर (Restrictive Thermometer) की सहायता से माप लिया जाता है।
10. पराश्रव्य तरंगों की आवृत्ति होती है-
(A) 20KHz से ऊपर
(B) 20,000 KHz से ऊपर
(C) 20 KHz से नीचे
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (A)
पराश्रव्य तरंगें ध्वनि तरंगों का एक प्रकार हैं। मनुष्य की सुनने की क्षमता के आधार पर ध्वनि तरंगों को तीन वगों में विभाजित किया गया है-
(i) अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves)- 20Hz से कम आवृत्ति मनुष्य इन तरंगों को सुनने में अक्षम है।
(ii) श्रव्य तरंगें (Audible Waves)- 20Hz-20KHz (20000Hz) मनुष्य इन्ही को सुनने में सक्षम है।
(iii) पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves)- 20KHz से अधिक। मनुष्य इन्हीं तरंगों को सुनने में अक्षम होता है।
पराश्रव्य तरंगे के उपयोग :- संकेत भेजने में, समुद्र की गहराई का पता लगाने में, मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने में आदि।
11. रेडियो-तंरगों के संचरण के लिए प्रयुक्त वायुपंडल का स्तर है-
(A) मध्यमंडल
(B) क्षोभमंडल
(C) आयनमंडल
(D) समतापमंडल
उत्तर (C)
रेडियों तरंगें उच्च तरंगदैध्ध्य (High Wavelength) तथा अत्यंत निम्न आवृत्ति (Low Freuency) वाली विद्युत चुम्बकोय तरगें हैं। रेडियों तरंगों के प्रसारण (Propagation) में आयनमंडल (lonosphere) स्तर की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो पृथ्वी की सतह से सामान्यत : 80 किमी. से 600 किमी, ऊॉँचाई पर स्थित है। आयनमंडल में मुक्त इलेक्ट्रॉन तथा आयनों का उच्च संकन्द्रण है। जिस कारण निप्न आवृत्ति (Low Frequency) वाली रैंडियों तरगे पृथ्वी पर परावर्तित (Refiect) कर दी जाती हैं। रेडियो तरंगों का प्रयोग लम्बी दूरी के संचार के लिए किया जाता है।
12. निम्नतलिखित में से किस माध्यम में ध्वनि अपेक्षाकृत तेज चलती है?
(A) कार्बन-डाइऑक्साइड
(B) लोहे की छड़
(C) भाप
(D) जल
उत्तर (B)
ध्वनि की चाल (Sped of Sound) गैसीय माध्यम में सबसे कम, द्रवों में अपेक्षाकृत अधिक तथा ठोस माध्यम में सर्वाधिक होती है। वायु में ध्वनि की चाल 343 मीटर/सेकण्ड, जल में 1484 मीटर /सेकण्ड तथा सबसे कठोर पदार्थ हीरे में 12000 मीटर / सेकण्ड होती है। इसलिए उपर्युक्त विकल्पों में ध्वनि की चाल कार्बन डाइऑक्साइड में सबसे कम (267 मी./से.), वाष्प (477.5 मी. से.) तथा जल (1484 मी. /से.) में अपेक्षाकृत अधिक तथा लोहे की छड़ (5130 मी./से.) में सवाधिक होगी।
13. जब किसी तालाब के शांत जल में पत्थर फेंका जाए तो तालाब में जल के पृष्ठ पर उठने वाली लहरें होती हैं-(A) वायु में ध्वनि तरंगे
(B) एक धागे पर अनुदैर्ध्य तरंगें
(C) एक धागे पर अनुप्रस्थ तरंगें
(D) प्रकाश तरंगें
उत्तर (C)
किसी शांत जल में पत्थर फेंकने पर पत्थर की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) के कारण जल में विक्षोभ (Disturbance) उत्पन्न होता है। जल के अणु अपने स्थान पर ही ऊपर-नीचे (जल की सतह के लम्बवत) गति करते हुए क्षेतिज दिशा (Horizontal Direction) में अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) का निर्माण करते हैं।
14. एम. आर. आई. मशीन में निम्न में से किसका प्रयोग किया जाता है?
(A) ध्वनि तरंग
(B) X-किरण
(C) पराश्रव्य तरंग
(D) चुम्बकीय तरंग
उत्तर (D)
चुम्बकीय अनुनाद चित्रण (Magnetic Resonance lmaging- MRI) एक चिकित्सीय तकनीक है जिसके माध्यम से मानव शरीर के आंतरिक अंगों के चित्र निर्मित किए जाते हैं। MRI मशीनों में प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र (Strong Magnetic Field), तथा रेडियों तरंगों का प्रयोग किया जाता है।
15. शिकार, अथवा मार्ग की बाधाओं का पता लगाने के लिए चमगादड एवं डॉल्फन किस परिघटना का प्रयोग करते हैं?
(A) ध्वनि का अपवर्तन
(B) विस्पंदों का बनना
(C) ध्वनि का प्रकीर्णन
(D) प्रतिध्वनि निर्धारण
उत्तर (D)
चमगादड तथा डॉल्फिन प्रतिध्वनि द्वारा स्थिति निर्धारण (Echolocation) विधि के द्वारा अपने शिकार एवं मार्ग की बाधाओं का पता लगाते हैं। ये दोनों जीव पराश्रव्य ध्वनि तरंगें (Uitrasonic Waves) उत्पन्न करते है। यं ध्वनि तरगे रडार द्वारा प्रक्षेपित प्रकाश तरंगों की भॉति मार्ग की रुकावट से टकराने के बाद उद्गम सोत तक लौट आती है। इस प्रकार ये अपनी संवेदनशील इंद्रियों से संभावित रुकावट की दिशा और दूरी का अनुमान लगा लेते हैं।
16. ध्वनि तरगें-
(A) निर्वात में चल सकती हैं ।
(B) केवल ठोस माध्यम में चल सकती हैं।
(C) केवल गैसों में चल सकती हैं।
(D) ठोस तथा गैस दोनों माध्यमों में चल सकती हं।
उत्तर (D)
ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है। ध्वनि तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में चल सकती हैं। ध्वनि तरंगों की गति गैसीय माध्यम में सबसे कम, द्रवों में अपेक्षाकृत अधिक तथा ठोस माध्यम में सर्वाधिक होती है।
17. पराबैंगनी किरणों में ऊर्जा किसकी अपेक्षा अधिक होती है?
(A) एक्स किरणों
(B) गामा किरणों
(C) अवरक्त किरणों
(D) पराबैंगनी किरणों
उत्तर (B)
विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्म में सर्वाधिक ऊर्जा एवं आवृत्ति तथा न्यूनतम तरंगदैध्ध्य गामा किरणों में पार्यी जाती है जबकि न्यूनतम ऊर्जा एवं आवृत्ति तथा सर्वांधिक तरंगदैर्ध्य रेडियो तरगों में पायी जाती है।
18. सी. टी. स्कैन करने में प्रयोग में लाई जाती हैं-
(A) अवरक्त किरणें (Infrared Rays)
(B) पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Waves)
(C) दृश्य प्रकाश (Visibel Light)
(D) एक्स-किरणें (X-Rays)
उत्तर (D)
सी.टी. (Computed Tomography) स्कैन मानव शरीर के अंगों की चिकित्सकीय परीक्षण की एक विधि है, जिसमें X- किरणों एवं कम्प्यूटर के प्रयोग द्वारा मानव शरीर के अंगों, अस्थियों आदि के चित्र निर्मित किए जाते हैं। सी.टी. स्कैन के माध्यम से शरीर के आन्तरिक भागों के चित्र एक्स-रे की अपेक्षा अधिक सूक्ष्मता से एवं विभिन्न कोणों (Multiple Angles) से लिए जाते हैं।
19. दो उत्तरोत्तर श्रृंग (Successive Crests) अथवा दो उत्तरोत्तर गर्त (Successive Troughs) के बीच की दूरी को क्या कहते हैं?
(A) आयाम (Amplitude)
(B) तरंग दैर्ध्य (Wavelength)
(C) आवृत्ति (Frequency)
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर (B)
किसी माध्यम में एक कण द्वारा एक पूरा कम्पन किए जाने पर तरंग जितनी दूरी तय करती है उसे तरंगदैध्य (Vavelength) कहते हैं। यह दो उत्तरोत्तर (लगातार) श्रृंग अथवा दो उतरोत्तर गर्त के बीच की दूरी होती है। इसे लेम्डा ( λ) से प्रदर्शित करते हैं।
20. कॉस्मिक किरणों के सम्बंध में निम्न कथनों में से कौन-सा सही नहीं है ?
(A) वे विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं।
(B) उनकी तरंग दैध्य बहुत छोटी होती है।
(C) ये बहुत अधिक ऊर्जा वाले आवेशित कणों से बनी होती हैं ।
(D) वे सूर्य से उत्पन्न होती हैं।
उत्तर (A)
कॉस्मिक किरणें विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्र्म का भाग नही हैं। ये उच्च ऊर्जा का विकिरण (High Energy Radiation) हैं, जो मुख्यतः सौरमंडल के बाहर उत्पन्न होती हैं। ये किरणें अंतरिक्ष में लगभग प्रकाश की गति से गमन करती हैं। कॉस्मिक किरणों की खोज वर्ष 1912 में वैज्ञनिक विक्टर हेस (Victor Hess) के द्वारा की गई थी।
